Posts

माँ जानती है

Image
माँ जानती है नन्हा सीखा है चलना घु टरुं-घुटरुं चलेगा दौड़ेगा लग ना जाये चोट इसलिए हटा लेती है घर के सभी फर्नीचर रास्ते से बना देती पूरे घर को खेल का मैदान माँ जानती है बेटा सीखने लगा है अक्षर जाने लगा है स्कूल हाथ मे पेंसिल लिए खींचेगा लकीरे इसलिए ठोक देती है बो र्ड घर की सारी दीवारो पर बना देती है पूरे घर को स्कूल को ब्लैक बोर्ड माँ जानती है बेटा लेने लगा है सपने आँखों ही आँखों मे बसने लगी है अप्सरा इसलिए बांधकर उसके सिर पर सेहरा कमरों की दीवारो पर लिख देती है प्रेम-कविताएँ और खींच कर परदे दरवाजों पर खुद छिप जाती है परदों के पा र माँ जानती है बेटा बन गया है पिता दो बच्चो का गृहस्थाश्रम के भंवर मे फंस गया है इस कदर कि उठा नहीं सकता बोझ बूढी माँ की खांसती देह का इसलिए माँ छोड देती है अपनी देह भी हौले-हौले और मुक्त हो जाती है हर जिम्मे से संगीता सेठी (मोज़िला फायरफौक्स की वर्कशौप में )

हर नस की रक्षा में हूँ ओ ! पुरुष !

Image
तूने सदा मुझे अपनी जूती तले दबाया और मैंने हमेशा तुम्हारी धमनिओं में बहना चाहा तू न जाने क्यों मुझे देखते रहे बेचारी समझ कर और बंद करके उस कोटडी में वीरता के परचम फहराते रहे इतना दंभ था पुरुष तुझमें फिर भी तेरा माथा झुकता रहा कभी तिलक के बहाने तो कभी आर्शीवाद के बहाने कभी तेरी कलाई मेरे सामने आ गयी याचना बन कर रक्षा की मैं तेरी रक्षा के लिए तेरे सिर से लेकर पाँव तक बहती रही और जब पहुंची पाँव तक तो तू समझ बैठा मुझे पाँव की चीज़ पर मैं तो तेरे हर अंग की हर नस की रक्षा में हूँ ओ ! पुरुष !

सतरंगी छटा

Image
बची हुई ऊन से इस कदर नमूना बन आएगा कल्पना से परे था |अपनी चुरू पोस्टिंग के दौरान बनाया वो भी केवल ट्रेन के चार घंटे के सफ़र में | सप्ताहांत में चार घंटे जाने के और चार घंटे आने के पर्याप्त थे बुनाई की तुष्टि के लिये | हर सलाई में १२ धागे चलते |कितनी भी सावधानी बरतती धागे उलझ ही जाते | इसलिए हर दो तीन सलाई के बाद ही सुलझा लेती | अलग-अलग थैली में रखने का नुस्खा भी कारगर नही हुआ| मुझे महसूस हुआ कि मैंने यह स्वेटर बनाते हुए बुना कम और सुलझाया ज्यादा है | पर आस्था ने पहना तो सतरंगी छटा धरती पर उतर आई |

नाम में क्या रखा है

Image
पता नहीं कब बच्चो के ना म लिखने कि धुन सवार हुई पर पहला नाम सृष्टि का लिखा स्वेटर पर वो सन था १९९१ | वो नाम वाला स्वेटर सबने पसंद तो किया ही आश्चर्य भी जताया | क्योंकि पारंपरिक स्वेटर बनाने वालों के लिये अजूबा था | फिर तो नाम लिखने का सिलसिला चला तो छवि , सृजन , हनी न जान कितने नाम लिख दिए पर उन सब का कोई फोटो नही है क्योंकि तब न कैमरा था मेरे पास और न ही लैपटॉप और सबसे बड़ी बात कि उनके एक्सपोज़र की भी कोई बात नही थी | जब आस्था की बारी आई तब तक बात फोटो तक पहुंची पर डिजिटल फिर भी नहीं था | यह तो स्कैन्ड फोटो है जी | "आस्था " नाम वाला यह स्वेटर भी बेहद पसंद किया गया | आस्था अब भी यह स्वेटर किसी को देना नही चाहती है | संजो कर रखना चाहती है |नाम में बहुत कुछ रखा है जी |

पेंटिंग वाला स्वेटर

Image
जब यह स्वेटर बनाया था तब एक बात थी मन में कि स्वेटर पर कोई नैचुरल सीन उकेर दूं | और दिमाग में पेड़ झोंपड़ी जैसी चीजें थी | पर जब बनाने लगी तो और भी पेंटिंग जैसी बातें याद आने लगी | मैंने सभी को ऊन से बनाने की कोशिश की | यह स्वेटर आश्चर्यजनक रहा | जब बुना गया तो हर सलाई में ११ ऊन के धागे चलते थे |अगला और पिछला हिस्सा सामान रूप से डिजाइनदार बुना गया | वर्धमान की जिस ऊन से बुना गया वो बेहद उम्दा और नर्म थी | ऐसा रंग इस किस्म में दुबारा नहीं आया | जब पहना गया तब बेहद सराहा गया और जब सरिता की प्रतियोगिता में भेजा गया तब न केवल प्रथम आया बल्कि मुखपृष्ठ पर प्रकाशित हुआ |

ट्यूनिक लुक

Image
यह गोल्डन येल्लो ऐ शेप फ्राक बनाने की संकल्पना थी | साथ ही मैं उसे ऐसा लुक देना चाहती थी कि वो ट्यूनिक का लुक भी दे | ट्यूनिक और पुलोवर अगर अलग हो तो ऊनी कपड़ा मोटा हो जाता है | इसलिए मैंने सामने नेक पर और स्लीव्ज़ में क्रीम रंग से लाइन बुन दी ताकि यह अलग लुक दे | करीब १५० फन्दों से शुरू करके कुछ दूरी पर एक एक फंदा घटाया है | बार्डर पर ट्विन बर्ड का फिगर बनाया है | कोई भी फिगर लिया जा सकता है |कंधे घटाने के साथ ही बीच से क्रीम रंग से वी शेप में बुना है | आपकी बिटिया इठला उठेगी यह यूनीक ड्रेस पहन कर जैसे मेरी बिटिया |

टक्स स्वेटर ने बदल दी मेरी दुनिया

Image
मैं कई वर्षों से अपने स्वेटरों के लिए पेंग्विन की तलाश में थी | एक दिन मैंने देखा मेरे लैपटॉप की स्क्रीन पर सृष्टि ने पेंग्विन ड़ाल दिया | मैंने पूछा यह यहाँ कैसे तो उसने बताया कि यह यह लीनक्स का लोगो है | मैंने लैपटॉप की स्क्रीन पर ग्राफ पेपर रखा तो स्क्रीन के पीछे से आती हुई लाईट में से पेंग्विन साफ़ चमक रहा था | मैंने सृष्टि को कहा की इस की ब्लैक पेन से आउट लाइन बना दे | उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये स्वेटर पर कैसे बनेगा | मैं नहीं सोच रही थी कि मेरी अगली योजना में ही यह शामिल है |जब मैंने ग्राफ के अनुसार स्वेटर बनाना शुरू किया तो सृष्टि को पता चला कि ये कैसे बन रहा है | पूरो पेंग्विन बन गया तो सृष्टि बोल उठी वाह ! ! ! फिर बोली इस पर अगर टी यूं एक्स भी लिख दिया जाए तो बस मजा ही आ जाए | क्योंकि टक्स लिनक्स के लोगो का नाम भी है |मैंने फिर ग्राफिंग की और टी यूं एक्स लिख दिया | जब स्पंदन ने स्वेटर पहना तो वो भी लीनक्स का लोगो लग रहा था | सृष्टि ने जब अपने इंजीनियरिंग कालेज के फ्रेंड्स को बताया तो सब की आश्चर्य भरी तारीफ़ ने मेरी कल्पना को नया आयाम दे दिया |