Monday, August 31, 2015

सृष्टि बोस्टन और मफलर

जब मुझे खबर मिली कि मेरी बेटी सृष्टि बोस्टन से चलकर अम्बिकापुर से केवल दो दिन के लिये आने वाली है तो मुझे समझ मे नही आ रहा था कि उसके लिये क्या गिफ्ट जुटाऊँ । फिर मुझे आइडिया सूझा कि हाथ से  एक मफलर बुन कर दे दूँ । उधेड़ बुन में दिन निकलते जा रहे थे । अनत: ऊन खरीदी गई ऑफ वाइट रंग की  और दूसरा रंग ग्रे लिया गया । पर दिन कम थे सो मैंने क्रोशिये से बुनने का फैसला किया । उसे कुछ अलग रूप देने के लिये किनारे सलाइयों से बुने और उस पर नाम उकेर दिया सृष्टि । दूसरे तरफ बॉस्टन तीसरी और चौथी तरफ एम.आई टी.| एक हफ्ता उसके आने में शेष था और मेरी उंगलियाँ तेजी से चल रही थी । आखिर बन ही गया मफलर । सबसे खुशी की बात यह थी कि उसे पसन्द आया । बॉस्टन जाकर उसने मुझे अपने  जन्मदिन पर कहा –“माँ ! आज आपका बुना मफलर पहन कर जा रही हूँ मुझे लगा मेरा बुनना सार्थक हो गया |




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